शादी के शुभ मुहूर्त: नवंबर 2026 से दिसंबर 2027
शादियों का सीजन शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के बाद फिर शुरू होता है, और पहला विवाह मुहूर्त शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है। नवंबर 2026 में 4 और दिसंबर 2026 में 7 मुहूर्त हैं, जिसके बाद दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक खरमास के कारण शादियां रुक जाती हैं। सीजन 15 जनवरी 2027 से फिर शुरू होता है, और जनवरी में 9 तथा फरवरी 2027 में 13 मुहूर्त हैं। नीचे दी गई सभी तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं; मुहूर्त का ठीक समय शहर के हिसाब से थोड़ा बदलता है, इसलिए अपने शहर का समय हमारे दैनिक पंचांग पर देख लें।
चातुर्मास में शादियां क्यों रुकती हैं और देवउठनी पर फिर क्यों शुरू होती हैं
हर साल चार चंद्र मास की एक अवधि होती है जिसे चातुर्मास (शाब्दिक अर्थ "चार महीने") कहते हैं; मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। बरसात के मौसम की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक की देवउठनी एकादशी तक कोई विवाह मुहूर्त नहीं निकाला जाता, इसीलिए उत्तर भारतीय पंचांग में जुलाई के आखिर से नवंबर के मध्य तक शादी की कोई तारीख नहीं होती। देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं, शुक्रवार 20 नवंबर 2026 को है, हालांकि कुछ परंपराएं इसे 21 नवंबर को मानती हैं, क्योंकि एकादशी तिथि उस दिन सुबह तक रहती है। यह भगवान विष्णु के जागने का दिन है, और इसके आसपास होने वाले तुलसी विवाह के साथ, प्रतीक रूप में, लोगों की शादियों का मौसम भी शुरू हो जाता है।
इस पोस्ट की तालिकाएं उसी उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार हैं। दक्षिण भारतीय पंचांगों में पूरे चातुर्मास शादियां नहीं रुकतीं: तेलुगु पंचांगों में श्रावण में विवाह मुहूर्त दिए जाते हैं, जो उत्तर भारतीय चातुर्मास के काफी भीतर है, और तमिल कैलेंडर आवणी में मुहूर्त देते हैं, जबकि तमिल परिवार आमतौर पर इसके बजाय आडी, पुरट्टासी और मार्गझी से बचते हैं। अगर आपका परिवार तेलुगु, कन्नड़ या तमिल पंचांग मानता है, तो अपने पुरोहित जी से उसी पंचांग की तारीखों की सूची मांगें।
2026 अधिक मास वाला साल है: एक अतिरिक्त चंद्र मास के कारण पूरा पंचांग सामान्य से आगे खिसक गया है। देवउठनी एकादशी आमतौर पर नवंबर की शुरुआत में आती है; 2026 में यह 20 नवंबर को है, इसलिए इस बार सर्दियों में शादियों का समय ज्यादातर सालों से छोटा और ज्यादा भीड़ वाला है। जो परिवार दिवाली (8 नवंबर) और छठ (13 से 16 नवंबर) के त्योहारों को ध्यान में रखकर योजना बना रहे हैं, उनके लिए शहनाई का मौसम लगभग तुरंत बाद ही शुरू हो जाएगा।
विवाह मुहूर्त: नवंबर 2026
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|
| 21 नवंबर 2026 | शनिवार | सुबह 6:49 से आधी रात के बाद 12:09 (22 नवंबर) तक | उत्तरा भाद्रपद, रेवती | द्वादशी |
| 24 नवंबर 2026 | मंगलवार | रात 11:26 से सुबह 6:51 (25 नवंबर) तक | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 25 नवंबर 2026 | बुधवार | सुबह 6:52 से सुबह 6:52 (26 नवंबर) तक | रोहिणी, मृगशिरा | प्रतिपदा, द्वितीया |
| 26 नवंबर 2026 | गुरुवार | सुबह 6:53 से शाम 5:47 तक | मृगशिरा | द्वितीया, तृतीया |
विवाह मुहूर्त: दिसंबर 2026
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|
| 2 दिसंबर 2026 | बुधवार | सुबह 10:33 से सुबह 6:57 (3 दिसंबर) तक | उत्तरा फाल्गुनी | नवमी, दशमी |
| 3 दिसंबर 2026 | गुरुवार | सुबह 6:58 से 10:54 तक; रात 11:05 से सुबह 6:58 (4 दिसंबर) तक | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त | दशमी, एकादशी |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | सुबह 6:59 से 10:23 तक | हस्त | एकादशी |
| 5 दिसंबर 2026 | शनिवार | सुबह 11:50 से सुबह 6:59 (6 दिसंबर) तक | स्वाति | द्वादशी, त्रयोदशी |
| 6 दिसंबर 2026 | रविवार | सुबह 7:00 से 7:42 तक | स्वाति | त्रयोदशी |
| 11 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | 12 दिसंबर तड़के 3:06 से सुबह 7:03 तक | उत्तराषाढ़ा | तृतीया |
| 12 दिसंबर 2026 | शनिवार | सुबह 7:04 से तड़के 3:28 (13 दिसंबर) तक | उत्तराषाढ़ा | तृतीया, चतुर्थी |
खरमास का विराम: दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक
12 दिसंबर 2026 के बाद मुहूर्त कैलेंडर फिर खाली हो जाता है। जब सूर्य धनु राशि में होते हैं, तो उस महीने को खरमास (दक्षिण भारत में धनुर्मास) कहा जाता है, और परंपरा से शादी जैसे नए शुभ कार्य टाल दिए जाते हैं। इस बार खरमास दिसंबर 2026 के मध्य से 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति तक रहेगा, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी वजह से पंचांग 16 से 31 दिसंबर 2026 और 1 से 14 जनवरी 2027 को विवाह के लिए वर्जित सौर मास के रूप में दिखाता है। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद पहला मुहूर्त 15 जनवरी 2027 को है। गृह प्रवेश पर भी यही नियम कुछ नरम रूप में लागू होता है; दिसंबर के आखिरी दिनों की कौन-सी तारीखें कुछ परंपराओं में फिर भी मान्य हैं, यह हमारी गृह प्रवेश मुहूर्त गाइड में बताया गया है।
विवाह मुहूर्त: जनवरी 2027
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|
| 15 जनवरी 2027 | शुक्रवार | सुबह 7:15 से दोपहर 2:13 तक | रेवती | सप्तमी |
| 18 जनवरी 2027 | सोमवार | रात 9:06 से 9:13 तक | रोहिणी | एकादशी |
| 19 जनवरी 2027 | मंगलवार | सुबह 7:50 से सुबह 7:13 (20 जनवरी) तक | रोहिणी, मृगशिरा | द्वादशी, त्रयोदशी |
| 20 जनवरी 2027 | बुधवार | सुबह 7:14 से शाम 4:17 तक | मृगशिरा | त्रयोदशी |
| 24 जनवरी 2027 | रविवार | सुबह 10:21 से रात 9:30 तक | मघा | द्वितीया, तृतीया |
| 26 जनवरी 2027 | मंगलवार | रात 8:20 से सुबह 7:11 (27 जनवरी) तक | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त | पंचमी, षष्ठी |
| 27 जनवरी 2027 | बुधवार | सुबह 7:12 से रात 11:56 तक | हस्त | षष्ठी |
| 30 जनवरी 2027 | शनिवार | 31 जनवरी तड़के 3:57 से सुबह 7:09 तक | अनुराधा | नवमी, दशमी |
| 31 जनवरी 2027 | रविवार | सुबह 7:10 से शाम 7:34 तक | अनुराधा | दशमी |
विवाह मुहूर्त: फरवरी 2027
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|
| 2 फरवरी 2027 | मंगलवार | शाम 5:49 से सुबह 7:08 (3 फरवरी) तक | मूल | द्वादशी |
| 3 फरवरी 2027 | बुधवार | सुबह 7:09 से दोपहर 12:26 तक | मूल | द्वादशी |
| 9 फरवरी 2027 | मंगलवार | 10 फरवरी तड़के 3:41 से सुबह 7:03 तक | उत्तरा भाद्रपद | चतुर्थी |
| 10 फरवरी 2027 | बुधवार | सुबह 7:04 से दोपहर 2:46 तक; 11 फरवरी तड़के 3:06 से सुबह 7:02 तक | उत्तरा भाद्रपद, रेवती | चतुर्थी, पंचमी |
| 11 फरवरी 2027 | गुरुवार | सुबह 7:03 से रात 11:31 तक | रेवती | पंचमी |
| 14 फरवरी 2027 | रविवार | 15 फरवरी तड़के 4:48 से सुबह 6:59 तक | रोहिणी | नवमी |
| 15 फरवरी 2027 | सोमवार | सुबह 7:00 से दोपहर 12:33 तक | रोहिणी | नवमी |
| 21 फरवरी 2027 | रविवार | सुबह 11:29 से दोपहर 1:51 तक | मघा | प्रतिपदा |
| 22 फरवरी 2027 | सोमवार | सुबह 11:56 से सुबह 5:00 (23 फरवरी) तक | उत्तरा फाल्गुनी | द्वितीया, तृतीया |
| 25 फरवरी 2027 | गुरुवार | सुबह 9:34 से सुबह 6:49 (26 फरवरी) तक | स्वाति | पंचमी, षष्ठी |
| 26 फरवरी 2027 | शुक्रवार | सुबह 6:50 से 10:14 तक | स्वाति | षष्ठी |
| 27 फरवरी 2027 | शनिवार | रात 10:10 से सुबह 6:47 (28 फरवरी) तक | अनुराधा | अष्टमी |
| 28 फरवरी 2027 | रविवार | सुबह 6:48 से दोपहर 1:47 तक | अनुराधा | अष्टमी |
विवाह मुहूर्त: मार्च 2027
गर्मियों के आते-आते सीजन धीमा पड़ जाता है, उससे पहले मार्च में सात मुहूर्त हैं। इनमें पहला हफ्ता सबसे अच्छा है।
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 1 मार्च 2027 | सोमवार | रात 11:13 से सुबह 6:45 (2 मार्च) तक | मूल |
| 2 मार्च 2027 | मंगलवार | सुबह 6:46 से दोपहर 3:25 तक | मूल |
| 3 मार्च 2027 | बुधवार | 4 मार्च, आधी रात के बाद 1:08 से सुबह 6:43 तक | उत्तराषाढ़ा |
| 4 मार्च 2027 | गुरुवार | सुबह 6:44 से आधी रात के बाद 1:36 (5 मार्च) तक | उत्तराषाढ़ा |
| 9 मार्च 2027 | मंगलवार | सुबह 9:59 से सुबह 6:36 (10 मार्च) तक | उत्तरा भाद्रपद |
| 10 मार्च 2027 | बुधवार | सुबह 6:37 से सुबह 5:13 (11 मार्च) तक | उत्तरा भाद्रपद, रेवती |
| 14 मार्च 2027 | रविवार | शाम 5:12 से सुबह 6:31 (15 मार्च) तक | रोहिणी |
विवाह मुहूर्त: अप्रैल 2027
मीन (खरमास) के विराम के बाद अप्रैल के मध्य में सीजन फिर शुरू होता है, और आखिरी हफ्ते में लगातार अच्छे मुहूर्त हैं।
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 18 अप्रैल 2027 | रविवार | सुबह 6:07 से रात 9:59 तक | उत्तरा फाल्गुनी |
| 19 अप्रैल 2027 | सोमवार | शाम 7:46 से सुबह 4:41 (20 अप्रैल) तक | हस्त |
| 21 अप्रैल 2027 | बुधवार | शाम 4:11 से सुबह 4:44 (22 अप्रैल) तक | स्वाति |
| 23 अप्रैल 2027 | शुक्रवार | दोपहर 2:15 से 3:54 तक; 24 अप्रैल तड़के 4:22 से सुबह 5:47 तक | अनुराधा |
| 24 अप्रैल 2027 | शनिवार | सुबह 5:48 से 6:57 तक | अनुराधा |
| 25 अप्रैल 2027 | रविवार | दोपहर 3:37 से सुबह 5:45 (26 अप्रैल) तक | मूल |
| 26 अप्रैल 2027 | सोमवार | सुबह 5:46 से 11:30 तक | मूल |
| 27 अप्रैल 2027 | मंगलवार | रात 11:14 से सुबह 5:43 (28 अप्रैल) तक | उत्तराषाढ़ा |
| 28 अप्रैल 2027 | बुधवार | सुबह 5:44 से शाम 5:31 तक | उत्तराषाढ़ा |
विवाह मुहूर्त: मई 2027
2027 के शादी के सीजन का सबसे बड़ा महीना - अठारह मुहूर्त, जिनमें 13 से 25 तारीख तक लगभग बिना रुके मुहूर्तों का सिलसिला भी है।
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 4 मई 2027 | मंगलवार | शाम 4:15 से 7:31 तक | रेवती |
| 7 मई 2027 | शुक्रवार | रात 11:43 से सुबह 5:35 (8 मई) तक | रोहिणी |
| 9 मई 2027 | रविवार | सुबह 5:35 से शाम 7:43 तक | मृगशिरा |
| 13 मई 2027 | गुरुवार | शाम 7:27 से सुबह 5:31 (14 मई) तक | मघा |
| 14 मई 2027 | शुक्रवार | सुबह 5:32 से 8:51 तक | मघा |
| 15 मई 2027 | शनिवार | दोपहर 12:01 से सुबह 4:31 (16 मई) तक | उत्तरा फाल्गुनी |
| 16 मई 2027 | रविवार | 17 मई, आधी रात के बाद 2:44 से सुबह 5:29 तक | हस्त |
| 17 मई 2027 | सोमवार | सुबह 5:30 से 11:29 तक | हस्त |
| 18 मई 2027 | मंगलवार | रात 11:57 से सुबह 5:28 (19 मई) तक | स्वाति |
| 19 मई 2027 | बुधवार | सुबह 5:29 से दोपहर 12:19 तक | स्वाति |
| 20 मई 2027 | गुरुवार | रात 10:28 से सुबह 5:27 (21 मई) तक | अनुराधा |
| 21 मई 2027 | शुक्रवार | सुबह 5:28 से दोपहर 2:51 तक | अनुराधा |
| 22 मई 2027 | शनिवार | रात 11:28 से सुबह 5:26 (23 मई) तक | मूल |
| 23 मई 2027 | रविवार | सुबह 5:27 से 7:42 तक | मूल |
| 24 मई 2027 | सोमवार | रात 10:09 से सुबह 5:25 (25 मई) तक | उत्तराषाढ़ा |
| 25 मई 2027 | मंगलवार | सुबह 5:26 से आधी रात के बाद 1:13 (26 मई) तक | उत्तराषाढ़ा |
| 30 मई 2027 | रविवार | सुबह 11:33 से रात 9:55 तक | उत्तरा भाद्रपद |
| 31 मई 2027 | सोमवार | सुबह 10:03 से सुबह 5:23 (1 जून) तक | उत्तरा भाद्रपद, रेवती |
विवाह मुहूर्त: जून 2027
बरसात का विराम आने से पहले एक और भरा हुआ महीना, जिसमें सोलह मुहूर्त हैं।
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 1 जून 2027 | मंगलवार | सुबह 5:24 से 6:46 तक | रेवती |
| 5 जून 2027 | शनिवार | सुबह 11:37 से दोपहर 12:11 तक | मृगशिरा |
| 9 जून 2027 | बुधवार | 10 जून, आधी रात के बाद 1:28 से सुबह 5:22 तक | मघा |
| 10 जून 2027 | गुरुवार | सुबह 5:23 से दोपहर 3:25 तक | मघा |
| 11 जून 2027 | शुक्रवार | शाम 5:29 से सुबह 5:22 (12 जून) तक | उत्तरा फाल्गुनी |
| 12 जून 2027 | शनिवार | सुबह 5:23 से 10:49 तक | उत्तरा फाल्गुनी |
| 13 जून 2027 | रविवार | सुबह 9:07 से शाम 5:00 तक | हस्त |
| 15 जून 2027 | मंगलवार | सुबह 6:48 से शाम 6:23 तक | स्वाति |
| 16 जून 2027 | बुधवार | शाम 7:45 से सुबह 5:22 (17 जून) तक | अनुराधा |
| 17 जून 2027 | गुरुवार | सुबह 5:23 से रात 9:30 तक | अनुराधा |
| 19 जून 2027 | शनिवार | सुबह 6:20 से आधी रात के बाद 2:13 (20 जून) तक | मूल |
| 20 जून 2027 | रविवार | 21 जून तड़के 5:05 से 5:23 तक | उत्तराषाढ़ा |
| 21 जून 2027 | सोमवार | सुबह 5:24 से रात 11:50 तक | उत्तराषाढ़ा |
| 26 जून 2027 | शनिवार | शाम 7:24 से सुबह 5:25 (27 जून) तक | उत्तरा भाद्रपद |
| 27 जून 2027 | रविवार | सुबह 5:26 से सुबह 5:25 (28 जून) तक | उत्तरा भाद्रपद, रेवती |
| 28 जून 2027 | सोमवार | सुबह 5:26 से 11:46 तक | रेवती |
विवाह मुहूर्त: जुलाई 2027
जुलाई 2027 के लिए कोई विवाह मुहूर्त नहीं दिया गया है: 7, 8, 9, 11 और 12 जुलाई को शुक्र सूर्य से 10 अंश के भीतर, यानी बहुत पास होते हैं, इसलिए अस्त माने जाते हैं, और 1 जुलाई का एकमात्र संभावित समय गण्ड योग में पड़ता है। दूसरे पंचांगों में जुलाई की कुछ तारीखें फिर भी हो सकती हैं; परिवार अपने पुरोहित जी की सलाह के अनुसार चल सकते हैं।
विवाह मुहूर्त: नवंबर 2027
देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास का विराम खत्म होने के बाद नवंबर में शादियां फिर शुरू होती हैं; तुलसी विवाह 11 नवंबर 2027 को है, जिसके साथ परंपरा के अनुसार शादियों का सीजन शुरू होता है। नवंबर के अंत तक ग्यारह मुहूर्त हैं।
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 10 नवंबर 2027 | बुधवार | सुबह 9:12 से रात 11:41 तक | उत्तरा भाद्रपद |
| 11 नवंबर 2027 | गुरुवार | रात 10:59 से आधी रात के बाद 1:42 (12 नवंबर) तक | रेवती |
| 15 नवंबर 2027 | सोमवार | दोपहर 3:23 से सुबह 6:00 (16 नवंबर) तक | रोहिणी |
| 16 नवंबर 2027 | मंगलवार | सुबह 6:44 से शाम 4:43 तक; 17 नवंबर तड़के 3:43 से 4:43 तक | मृगशिरा |
| 20 नवंबर 2027 | शनिवार | 21 नवंबर तड़के 4:49 से सुबह 6:47 तक | मघा |
| 21 नवंबर 2027 | रविवार | सुबह 6:48 से शाम 7:25 तक | मघा |
| 23 नवंबर 2027 | मंगलवार | दोपहर 2:09 से सुबह 6:50 (24 नवंबर) तक | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त |
| 24 नवंबर 2027 | बुधवार | सुबह 6:51 से शाम 6:53 तक | हस्त |
| 25 नवंबर 2027 | गुरुवार | शाम 6:18 से सुबह 6:51 (26 नवंबर) तक | स्वाति |
| 26 नवंबर 2027 | शुक्रवार | सुबह 6:52 से 9:48 तक | स्वाति |
| 29 नवंबर 2027 | सोमवार | 30 नवंबर, आधी रात के बाद 2:14 से 2:30 तक | मूल |
विवाह मुहूर्त: दिसंबर 2027
दिसंबर के मध्य में खरमास का विराम शुरू होने से पहले सात तारीखें, जिनके साथ 2027 का सीजन पूरा होता है।
| तारीख | दिन | मुहूर्त का समय (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 2 दिसंबर 2027 | गुरुवार | दोपहर 1:45 से आधी रात के बाद 2:30 (3 दिसंबर) तक | उत्तराषाढ़ा |
| 7 दिसंबर 2027 | मंगलवार | दोपहर 2:16 से सुबह 6:58 (8 दिसंबर) तक | उत्तरा भाद्रपद |
| 8 दिसंबर 2027 | बुधवार | 9 दिसंबर सुबह 6:36 से 7:01 तक | रेवती |
| 9 दिसंबर 2027 | गुरुवार | सुबह 7:02 से 11:09 तक | रेवती |
| 12 दिसंबर 2027 | रविवार | शाम 4:43 से रात 11:55 तक | रोहिणी |
| 13 दिसंबर 2027 | सोमवार | सुबह 10:51 से सुबह 7:05 (14 दिसंबर) तक | रोहिणी, मृगशिरा |
| 14 दिसंबर 2027 | मंगलवार | सुबह 7:06 से दोपहर 1:25 तक | मृगशिरा |
चातुर्मास का अंतराल: जुलाई के मध्य से नवंबर 2027 की शुरुआत तक
जुलाई की देवशयनी एकादशी और 10 नवंबर 2027 की देवउठनी एकादशी के बीच कोई विवाह मुहूर्त नहीं है - यह वही चार महीने का विराम है जिसके बारे में इस पोस्ट की शुरुआत में बताया गया है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2027 में इस पंचांग के अनुसार शादी की एक भी तारीख नहीं है, इसलिए अगर आप 2027 के आखिर में शादी की योजना बना रहे हैं, तो आपके पास नवंबर और दिसंबर ही हैं, और इनकी अच्छी तारीखों पर पुरोहित और विवाह स्थल सबसे जल्दी बुक होते हैं।
कोई तारीख विवाह मुहूर्त कैसे बनती है
विवाह मुहूर्त सुविधा देखकर नहीं चुना जाता; यह वह समय है जब पंचांग की कई बातें एक साथ शुभ बैठती हैं। आसान शब्दों में, पंचांग बनाने वाले ये बातें देखते हैं:
- तिथि (चंद्र दिवस): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी और त्रयोदशी जैसी कुछ तिथियां स्थायी वैवाहिक जीवन के लिए शुभ मानी जाती हैं। अमावस्या और कुछ दूसरी तिथियों से बचा जाता है।
- नक्षत्र (जिस नक्षत्र में चंद्रमा हों): रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती विवाह के पारंपरिक नक्षत्र हैं, और ऊपर की तालिकाओं में आपको ठीक यही नक्षत्र दिखेंगे।
- शुक्र या गुरु अस्त न हों: जब शुक्र या गुरु (बृहस्पति) सूर्य के बहुत पास आ जाते हैं, तो वह ग्रह "अस्त" कहलाता है, यानी सूर्य की चमक में उसकी रोशनी खो जाती है। पारंपरिक मान्यता में शुक्र प्रेम और विवाह के कारक हैं और गुरु ज्ञान तथा पति के कल्याण के, इसलिए इनमें से कोई भी अस्त हो तो विवाह मुहूर्त नहीं निकाला जाता, तिथि चाहे कितनी भी अच्छी हो।
- दिन के भीतर शुद्ध समय: मुहूर्त वाली तारीख पर भी राहु काल और भद्रा जैसे अशुभ समय टाले जाते हैं, इसीलिए हर तारीख के साथ पूरा दिन नहीं, एक तय समय दिया गया है।
इसी कारण अलग-अलग पंचांग परंपराओं की मुहूर्त सूचियों में थोड़ा अंतर होता है। ऊपर की तालिकाओं को भरोसेमंद शॉर्टलिस्ट मानें, और अंतिम लग्न (विवाह का ठीक समय) अपने शहर और दोनों की कुंडलियों के हिसाब से अपने पुरोहित जी से तय करवाएं।
मुहूर्त को वर-वधू की कुंडली से मिलाना
छपा हुआ मुहूर्त कैलेंडर एक आम सूची है, जो सबके लिए ठीक है। इसके बाद परिवार उसमें से वह तारीख छांटते हैं जो उस खास जोड़े के लिए ठीक हो। पुरोहित या ज्योतिषी दोनों की जन्म कुंडलियां मिलाते हैं (कुंडली मिलान या गुण मिलान), वर-वधू के जन्म नक्षत्र को विवाह के दिन के नक्षत्र से मिलाकर देखते हैं, चंद्र बल और तारा बल (उस दिन दोनों में से हर एक के लिए चंद्रमा का बल) पर विचार करते हैं, और चल रही दशाओं को भी देखते हैं। पंचांग में जो तारीख बहुत अच्छी हो, वह किसी खास जोड़े के लिए छोड़ी भी जा सकती है, और एक साधारण तारीख भी आगे आ सकती है क्योंकि वह दोनों कुंडलियों से मेल खाती है। काम की बात यह है: ऊपर की तालिकाओं से दो-तीन तारीखें चुन लें, फिर विवाह स्थल बुक करने से पहले पुरोहित जी से कुंडलियों के आधार पर सबसे अच्छी तारीख पक्की करवा लें।
अगर रिश्ता अभी तय हो रहा है, तो 36 गुणों के स्कोर का मतलब बताने वाली हमारी गाइड आठ कूटों को समझाती है और बताती है कि परंपरा में 18 की सीमा क्यों मानी जाती है; आप कुंडली मिलान टूल से दो कुंडलियां मिला भी सकते हैं। इससे भी पहले परिवार एक पन्ने का बायोडाटा आपस में भेजते हैं - उसमें क्या-क्या होना चाहिए, और एक बायोडाटा मेकर, जो जन्म विवरण से राशि, नक्षत्र और मांगलिक स्थिति खुद भर देता है।
अगर आप अभी इसी पड़ाव पर हैं, तो विवाह के लिए या सगाई और शादी से पहले की रस्मों के लिए Purohit.app पर जांचे-परखे पुरोहित के लिए अनुरोध भेज सकते हैं; दिल्ली में विवाह, मुंबई, बेंगलुरु में सगाई और हैदराबाद में शादी के लिए हमारे पेज देखें, और पुरोहित जी चुनी हुई तारीखों में से आपका लग्न तय करने में भी मदद करेंगे।
हिंदू विवाह में पुरोहित क्या करते हैं
पुरोहित केवल मंत्र पढ़ने वाले नहीं होते; वे पूरे विवाह संस्कार का संचालन करते हैं। शादी के दिन से पहले वे लग्न तय करते हैं, पूजा सामग्री की सूची बनाते हैं और अक्सर सगाई, गणेश पूजा और हल्दी भी करवाते हैं। शादी के दिन वे वह पूरा क्रम करवाते हैं जिससे हिंदू विवाह पूर्ण होता है: विघ्न दूर करने के लिए गणेश वंदना, कन्यादान, विवाह हवन के लिए पवित्र अग्नि प्रज्वलित करना, पाणिग्रहण (वर का वधू का हाथ थामना), और सप्तपदी, यानी अग्नि के चारों ओर सात कदम (सात फेरे), जिनमें वर-वधू सात वचन लेते हैं। वे हर मंत्र का अर्थ बताते हुए उसका उच्चारण करते हैं, वर पक्ष और वधू पक्ष को उनकी भूमिका समझाते हैं, और अंत में आशीर्वाद के साथ विवाह संपन्न करते हैं। पारंपरिक विवाह में लगभग दो से तीन घंटे लगते हैं, और एक अच्छे पुरोहित आपके परिवार की सबसे सहज भाषा में हर चरण खुशी-खुशी समझा देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में शादियों का सीजन कब शुरू होगा?
सीजन शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के बाद शुरू होता है। सीजन का पहला विवाह मुहूर्त शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है।
नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच शादी के कितने मुहूर्त हैं?
दिल्ली के लिए कुल 33 तारीखें हैं: नवंबर 2026 में 4, दिसंबर 2026 में 7, जनवरी 2027 में 9 और फरवरी 2027 में 13।
12 दिसंबर 2026 के बाद से 15 जनवरी 2027 को सीजन दोबारा शुरू होने तक शादी की तारीखें क्यों नहीं हैं?
यह खरमास (दक्षिण भारत में धनुर्मास) का समय है, जब सूर्य धनु राशि में होते हैं। परंपरा से शादी जैसे नए कार्य 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति तक रोक दिए जाते हैं, और उसके बाद पहला मुहूर्त 15 जनवरी 2027 को है।
2026 में जुलाई के आखिर से नवंबर के मध्य तक शादियां क्यों नहीं हुईं?
वह चातुर्मास का समय था, यानी भगवान विष्णु की योगनिद्रा के चार महीने, जिनमें उत्तर भारतीय पंचांग में विवाह मुहूर्त नहीं निकाले जाते। 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद शादियां फिर शुरू होती हैं।
क्या मुहूर्त के ये समय हर शहर के लिए सही हैं?
ऊपर दिए गए समय नई दिल्ली के लिए निकाले गए हैं। लगभग हर मामले में तारीखें पूरे उत्तर और मध्य भारत में वही रहती हैं (तेलुगु और तमिल पंचांगों की अपनी सूचियां होती हैं), पर शुरू और खत्म होने का समय स्थानीय सूर्योदय के साथ बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें और अंतिम लग्न अपने पुरोहित जी से पक्का करवाएं। आधी रात के बाद तक चलने वाला मुहूर्त उसी तारीख के नीचे दिया गया है, जिसका वह पंचांग के अनुसार है: जो मुहूर्त अगली तारीख पर खत्म होता है, वह उस पूरी रात चलता है, और जो आधी रात के बाद शुरू होकर सूर्योदय से पहले खत्म होता है, वह पहले कॉलम में दी गई तारीख की रात का है।
शुक्र अस्त क्या होता है, और इसमें शादियां क्यों नहीं होतीं?
जब शुक्र सूर्य के बहुत पास आ जाते हैं, तो उन्हें अस्त कहा जाता है और माना जाता है कि उनका शुभ प्रभाव मंद पड़ जाता है। शुक्र विवाह के कारक ग्रह हैं, इसलिए शुक्र अस्त रहने के दौरान कोई विवाह मुहूर्त नहीं निकाला जाता, और गुरु पर भी यही नियम लागू होता है।
क्या मुहूर्त की सूची से बाहर की तारीख पर शादी कर सकते हैं?
परंपरा सूची में दिए मुहूर्त को ही प्राथमिकता देती है, क्योंकि ये तारीखें तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की सारी जांच में खरी उतरती हैं। अगर हालात के कारण कोई दूसरी तारीख लेनी पड़े, तो पुरोहित जी से सलाह लें; वे वर-वधू की कुंडलियां देखकर कोई उपयुक्त समय निकाल सकते हैं, पर छपी हुई तारीखें ही सबसे सुरक्षित विकल्प रहती हैं।
इस सीजन में शादी की सबसे शुभ तारीखें कौन-सी हैं?
रोहिणी नक्षत्र वाली तारीखें (24 और 25 नवंबर 2026, 19 जनवरी 2027, और 14 और 15 फरवरी 2027) खास तौर पर शुभ मानी जाती हैं, और उसी तरह 21 नवंबर 2026 और 11 फरवरी 2027 के लंबे, लगातार मुहूर्त भी। फिर भी आपके लिए सबसे अच्छी तारीख वही है जो दोनों कुंडलियों से भी मेल खाए।
हम कैसे जाँचते हैं: हमारी गाइड में दी गई तिथियाँ और मुहूर्त प्रकाशित करने से पहले पंचांग से मिलाए जाते हैं, और व्यावहारिक बातें - सामग्री, समय, दक्षिणा - Purohit.app पर हुई असली बुकिंग पर आधारित हैं। परंपराएँ समुदाय के अनुसार अलग होती हैं; आपके पुरोहित की सलाह ही मान्य है। यह पेज हमारी अंग्रेज़ी गाइड का अनुवाद है। कहीं कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी पेज को ही सही मानें।