लग्नाचे मुहूर्त: नोव्हेंबर 2026 ते डिसेंबर 2027
शुक्रवार, 20 नोव्हेंबर 2026 रोजीच्या प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीनंतर लग्नसराई पुन्हा सुरू होते, आणि पहिला विवाह मुहूर्त शनिवार, 21 नोव्हेंबर 2026 रोजी आहे. नोव्हेंबर 2026 मध्ये 4 आणि डिसेंबर 2026 मध्ये 7 मुहूर्त आहेत; त्यानंतर डिसेंबरच्या मध्यापासून जानेवारीच्या मध्यापर्यंत खरमासामुळे लग्ने थांबतात. 15 जानेवारी 2027 पासून लग्नसराई पुन्हा सुरू होते - जानेवारीत 9 आणि फेब्रुवारी 2027 मध्ये 13 मुहूर्त आहेत. खालील सर्व तारखा नवी दिल्लीसाठी आहेत; नेमक्या वेळा शहरानुसार थोड्या बदलतात, म्हणून तुमच्या ठिकाणच्या वेळा आमच्या दैनिक पंचांगात पाहून खात्री करा.
चातुर्मासात लग्ने का थांबतात आणि प्रबोधिनी एकादशीला पुन्हा का सुरू होतात
दरवर्षी चार चांद्र महिने, म्हणजेच चातुर्मास (शब्दशः "चार महिने"), भगवान विष्णू योगनिद्रेत असतात, अशी श्रद्धा आहे. पावसाळ्यातील देवशयनी (आषाढी) एकादशीपासून कार्तिकातील प्रबोधिनी एकादशीपर्यंत विवाहाचे मुहूर्त दिले जात नाहीत; म्हणूनच उत्तर भारतीय पंचांगात जुलैच्या अखेरीपासून नोव्हेंबरच्या मध्यापर्यंत लग्नाची एकही तारीख नसते. प्रबोधिनी एकादशी, जिला देवउठनी एकादशीही म्हणतात, शुक्रवार, 20 नोव्हेंबर 2026 रोजी आहे; मात्र एकादशी तिथी दुसऱ्या दिवशी सकाळपर्यंत असल्याने काही परंपरांमध्ये ती 21 नोव्हेंबरला पाळली जाते. या दिवशी विष्णू योगनिद्रेतून जागे होतात, आणि त्या सुमारास होणाऱ्या तुळशी विवाहाने प्रतीकात्मकरीत्या माणसांच्या लग्नसराईचीही सुरुवात होते.
या लेखातील तक्ते त्याच उत्तर भारतीय पंचांगानुसार आहेत. दक्षिण भारतीय पंचांगे संपूर्ण चातुर्मासभर बंद नसतात: तेलुगू पंचांगांत श्रावणात विवाह मुहूर्त दिलेले असतात, जो उत्तर भारतीय चातुर्मासाच्या बराच आत येतो, आणि तमिळ दिनदर्शिकांत आवणीत मुहूर्त असतात, तर तमिळ कुटुंबे त्याऐवजी साधारणपणे आडी, पुरट्टासी आणि मार्गळी हे महिने टाळतात. तुमचे कुटुंब तेलुगू, कन्नड किंवा तमिळ पंचांग पाळत असेल, तर त्या पंचांगातील तारखांची यादी तुमच्या पुरोहितांकडून घ्या.
2026 हे अधिक मासाचे वर्ष असल्याने, एका जास्तीच्या चांद्र महिन्यामुळे संपूर्ण पंचांग नेहमीपेक्षा पुढे सरकले आहे. प्रबोधिनी एकादशी सहसा नोव्हेंबरच्या सुरुवातीला येते; 2026 मध्ये ती 20 नोव्हेंबरला आहे, त्यामुळे यंदाची हिवाळ्यातील लग्नसराई बहुतेक वर्षांपेक्षा लहान आणि अधिक गर्दीची आहे. दिवाळी (8 नोव्हेंबर) आणि छठ पूजा (13 ते 16 नोव्हेंबर) या सणासुदीच्या दिवसांचा विचार करून नियोजन करणाऱ्यांना सनईचौघड्यांचा हंगाम त्यानंतर लगेचच सुरू होताना दिसेल.
विवाह मुहूर्त: नोव्हेंबर 2026
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथी |
|---|---|---|---|---|
| 21 नोव्हेंबर 2026 | शनिवार | सकाळी 6:49 ते मध्यरात्री 12:09 (22 नोव्हेंबर) | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती | द्वादशी |
| 24 नोव्हेंबर 2026 | मंगळवार | रात्री 11:26 ते 25 नोव्हेंबर, सकाळी 6:51 | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 25 नोव्हेंबर 2026 | बुधवार | सकाळी 6:52 ते 26 नोव्हेंबर, सकाळी 6:52 | रोहिणी, मृगशीर्ष | प्रतिपदा, द्वितीया |
| 26 नोव्हेंबर 2026 | गुरुवार | सकाळी 6:53 ते संध्याकाळी 5:47 | मृगशीर्ष | द्वितीया, तृतीया |
विवाह मुहूर्त: डिसेंबर 2026
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथी |
|---|---|---|---|---|
| 2 डिसेंबर 2026 | बुधवार | सकाळी 10:33 ते 3 डिसेंबर, सकाळी 6:57 | उत्तरा फाल्गुनी | नवमी, दशमी |
| 3 डिसेंबर 2026 | गुरुवार | सकाळी 6:58 ते 10:54; रात्री 11:05 ते 4 डिसेंबर, सकाळी 6:58 | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त | दशमी, एकादशी |
| 4 डिसेंबर 2026 | शुक्रवार | सकाळी 6:59 ते 10:23 | हस्त | एकादशी |
| 5 डिसेंबर 2026 | शनिवार | सकाळी 11:50 ते 6 डिसेंबर, सकाळी 6:59 | स्वाती | द्वादशी, त्रयोदशी |
| 6 डिसेंबर 2026 | रविवार | सकाळी 7:00 ते 7:42 | स्वाती | त्रयोदशी |
| 11 डिसेंबर 2026 | शुक्रवार | 12 डिसेंबर, पहाटे 3:06 ते सकाळी 7:03 | उत्तराषाढा | तृतीया |
| 12 डिसेंबर 2026 | शनिवार | सकाळी 7:04 ते 13 डिसेंबर, पहाटे 3:28 | उत्तराषाढा | तृतीया, चतुर्थी |
खरमासातील विराम: डिसेंबरच्या मध्यापासून जानेवारीच्या मध्यापर्यंत
12 डिसेंबर 2026 नंतर मुहूर्तांचे पंचांग पुन्हा शांत होते. सूर्य धनु राशीत असतो त्या महिन्याला खरमास (दक्षिण भारतात धनुर्मास) म्हणतात, आणि लग्नासारखे नवे शुभारंभ परंपरेने या काळात टाळले जातात. या वेळी खरमास डिसेंबर 2026 च्या मध्यापासून 14 जानेवारी 2027 च्या मकर संक्रांतीपर्यंत आहे; त्या दिवशी सूर्य मकर राशीत प्रवेश करतो. त्यानुसार पंचांगाने 16 ते 31 डिसेंबर 2026 आणि 1 ते 14 जानेवारी 2027 हा काळ विवाहासाठी वर्ज्य सौर मास म्हणून दाखवला आहे. सूर्याच्या उत्तरायणानंतरचा पहिला मुहूर्त 15 जानेवारी 2027 रोजी आहे. गृहप्रवेशालाही हाच नियम काहीशा सौम्य स्वरूपात लागू होतो; डिसेंबरच्या अखेरीच्या कोणत्या तारखा काही परंपरांमध्ये अजूनही चालतात, हे आमच्या गृहप्रवेश मुहूर्त मार्गदर्शकात दिले आहे.
विवाह मुहूर्त: जानेवारी 2027
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथी |
|---|---|---|---|---|
| 15 जानेवारी 2027 | शुक्रवार | सकाळी 7:15 ते दुपारी 2:13 | रेवती | सप्तमी |
| 18 जानेवारी 2027 | सोमवार | रात्री 9:06 ते 9:13 | रोहिणी | एकादशी |
| 19 जानेवारी 2027 | मंगळवार | सकाळी 7:50 ते 20 जानेवारी, सकाळी 7:13 | रोहिणी, मृगशीर्ष | द्वादशी, त्रयोदशी |
| 20 जानेवारी 2027 | बुधवार | सकाळी 7:14 ते दुपारी 4:17 | मृगशीर्ष | त्रयोदशी |
| 24 जानेवारी 2027 | रविवार | सकाळी 10:21 ते रात्री 9:30 | मघा | द्वितीया, तृतीया |
| 26 जानेवारी 2027 | मंगळवार | रात्री 8:20 ते 27 जानेवारी, सकाळी 7:11 | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त | पंचमी, षष्ठी |
| 27 जानेवारी 2027 | बुधवार | सकाळी 7:12 ते रात्री 11:56 | हस्त | षष्ठी |
| 30 जानेवारी 2027 | शनिवार | 31 जानेवारी, पहाटे 3:57 ते सकाळी 7:09 | अनुराधा | नवमी, दशमी |
| 31 जानेवारी 2027 | रविवार | सकाळी 7:10 ते संध्याकाळी 7:34 | अनुराधा | दशमी |
विवाह मुहूर्त: फेब्रुवारी 2027
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र | तिथी |
|---|---|---|---|---|
| 2 फेब्रुवारी 2027 | मंगळवार | संध्याकाळी 5:49 ते 3 फेब्रुवारी, सकाळी 7:08 | मूळ | द्वादशी |
| 3 फेब्रुवारी 2027 | बुधवार | सकाळी 7:09 ते दुपारी 12:26 | मूळ | द्वादशी |
| 9 फेब्रुवारी 2027 | मंगळवार | 10 फेब्रुवारी, पहाटे 3:41 ते सकाळी 7:03 | उत्तरा भाद्रपदा | चतुर्थी |
| 10 फेब्रुवारी 2027 | बुधवार | सकाळी 7:04 ते दुपारी 2:46; 11 फेब्रुवारी, पहाटे 3:06 ते सकाळी 7:02 | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती | चतुर्थी, पंचमी |
| 11 फेब्रुवारी 2027 | गुरुवार | सकाळी 7:03 ते रात्री 11:31 | रेवती | पंचमी |
| 14 फेब्रुवारी 2027 | रविवार | 15 फेब्रुवारी, पहाटे 4:48 ते सकाळी 6:59 | रोहिणी | नवमी |
| 15 फेब्रुवारी 2027 | सोमवार | सकाळी 7:00 ते दुपारी 12:33 | रोहिणी | नवमी |
| 21 फेब्रुवारी 2027 | रविवार | सकाळी 11:29 ते दुपारी 1:51 | मघा | प्रतिपदा |
| 22 फेब्रुवारी 2027 | सोमवार | सकाळी 11:56 ते 23 फेब्रुवारी, पहाटे 5:00 | उत्तरा फाल्गुनी | द्वितीया, तृतीया |
| 25 फेब्रुवारी 2027 | गुरुवार | सकाळी 9:34 ते 26 फेब्रुवारी, सकाळी 6:49 | स्वाती | पंचमी, षष्ठी |
| 26 फेब्रुवारी 2027 | शुक्रवार | सकाळी 6:50 ते 10:14 | स्वाती | षष्ठी |
| 27 फेब्रुवारी 2027 | शनिवार | रात्री 10:10 ते 28 फेब्रुवारी, सकाळी 6:47 | अनुराधा | अष्टमी |
| 28 फेब्रुवारी 2027 | रविवार | सकाळी 6:48 ते दुपारी 1:47 | अनुराधा | अष्टमी |
विवाह मुहूर्त: मार्च 2027
उन्हाळ्याच्या आधी लग्नसराई थोडी मंदावण्यापूर्वीचे सात मुहूर्त. मार्चचा पहिला आठवडा सर्वात चांगला आहे.
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 1 मार्च 2027 | सोमवार | रात्री 11:13 ते 2 मार्च, सकाळी 6:45 | मूळ |
| 2 मार्च 2027 | मंगळवार | सकाळी 6:46 ते दुपारी 3:25 | मूळ |
| 3 मार्च 2027 | बुधवार | 4 मार्च, मध्यरात्रीनंतर 1:08 ते सकाळी 6:43 | उत्तराषाढा |
| 4 मार्च 2027 | गुरुवार | सकाळी 6:44 ते मध्यरात्रीनंतर 1:36 (5 मार्च) | उत्तराषाढा |
| 9 मार्च 2027 | मंगळवार | सकाळी 9:59 ते 10 मार्च, सकाळी 6:36 | उत्तरा भाद्रपदा |
| 10 मार्च 2027 | बुधवार | सकाळी 6:37 ते 11 मार्च, पहाटे 5:13 | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती |
| 14 मार्च 2027 | रविवार | संध्याकाळी 5:12 ते 15 मार्च, सकाळी 6:31 | रोहिणी |
विवाह मुहूर्त: एप्रिल 2027
मीन खरमासाच्या विरामानंतर एप्रिलच्या मध्यात लग्नसराई पुन्हा सुरू होते, आणि शेवटच्या आठवड्यात सलग चांगले मुहूर्त आहेत.
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 18 एप्रिल 2027 | रविवार | सकाळी 6:07 ते रात्री 9:59 | उत्तरा फाल्गुनी |
| 19 एप्रिल 2027 | सोमवार | संध्याकाळी 7:46 ते 20 एप्रिल, पहाटे 4:41 | हस्त |
| 21 एप्रिल 2027 | बुधवार | दुपारी 4:11 ते 22 एप्रिल, पहाटे 4:44 | स्वाती |
| 23 एप्रिल 2027 | शुक्रवार | दुपारी 2:15 ते 3:54; 24 एप्रिल, पहाटे 4:22 ते 5:47 | अनुराधा |
| 24 एप्रिल 2027 | शनिवार | पहाटे 5:48 ते सकाळी 6:57 | अनुराधा |
| 25 एप्रिल 2027 | रविवार | दुपारी 3:37 ते 26 एप्रिल, पहाटे 5:45 | मूळ |
| 26 एप्रिल 2027 | सोमवार | पहाटे 5:46 ते सकाळी 11:30 | मूळ |
| 27 एप्रिल 2027 | मंगळवार | रात्री 11:14 ते 28 एप्रिल, पहाटे 5:43 | उत्तराषाढा |
| 28 एप्रिल 2027 | बुधवार | पहाटे 5:44 ते संध्याकाळी 5:31 | उत्तराषाढा |
विवाह मुहूर्त: मे 2027
2027 च्या लग्नसराईतील सर्वात मोठा महिना - अठरा मुहूर्त, त्यात 13 ते 25 तारखेपर्यंत जवळजवळ सलग मुहूर्त आहेत.
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 4 मे 2027 | मंगळवार | दुपारी 4:15 ते संध्याकाळी 7:31 | रेवती |
| 7 मे 2027 | शुक्रवार | रात्री 11:43 ते 8 मे, पहाटे 5:35 | रोहिणी |
| 9 मे 2027 | रविवार | पहाटे 5:35 ते संध्याकाळी 7:43 | मृगशीर्ष |
| 13 मे 2027 | गुरुवार | संध्याकाळी 7:27 ते 14 मे, पहाटे 5:31 | मघा |
| 14 मे 2027 | शुक्रवार | पहाटे 5:32 ते सकाळी 8:51 | मघा |
| 15 मे 2027 | शनिवार | दुपारी 12:01 ते 16 मे, पहाटे 4:31 | उत्तरा फाल्गुनी |
| 16 मे 2027 | रविवार | 17 मे, पहाटे 2:44 ते 5:29 | हस्त |
| 17 मे 2027 | सोमवार | पहाटे 5:30 ते सकाळी 11:29 | हस्त |
| 18 मे 2027 | मंगळवार | रात्री 11:57 ते 19 मे, पहाटे 5:28 | स्वाती |
| 19 मे 2027 | बुधवार | पहाटे 5:29 ते दुपारी 12:19 | स्वाती |
| 20 मे 2027 | गुरुवार | रात्री 10:28 ते 21 मे, पहाटे 5:27 | अनुराधा |
| 21 मे 2027 | शुक्रवार | पहाटे 5:28 ते दुपारी 2:51 | अनुराधा |
| 22 मे 2027 | शनिवार | रात्री 11:28 ते 23 मे, पहाटे 5:26 | मूळ |
| 23 मे 2027 | रविवार | पहाटे 5:27 ते सकाळी 7:42 | मूळ |
| 24 मे 2027 | सोमवार | रात्री 10:09 ते 25 मे, पहाटे 5:25 | उत्तराषाढा |
| 25 मे 2027 | मंगळवार | पहाटे 5:26 ते मध्यरात्रीनंतर 1:13 (26 मे) | उत्तराषाढा |
| 30 मे 2027 | रविवार | सकाळी 11:33 ते रात्री 9:55 | उत्तरा भाद्रपदा |
| 31 मे 2027 | सोमवार | सकाळी 10:03 ते 1 जून, पहाटे 5:23 | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती |
विवाह मुहूर्त: जून 2027
पावसाळ्यातील विराम जवळ येण्यापूर्वी आणखी एक भरगच्च महिना - सोळा मुहूर्त.
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 1 जून 2027 | मंगळवार | पहाटे 5:24 ते सकाळी 6:46 | रेवती |
| 5 जून 2027 | शनिवार | सकाळी 11:37 ते दुपारी 12:11 | मृगशीर्ष |
| 9 जून 2027 | बुधवार | 10 जून, मध्यरात्रीनंतर 1:28 ते पहाटे 5:22 | मघा |
| 10 जून 2027 | गुरुवार | पहाटे 5:23 ते दुपारी 3:25 | मघा |
| 11 जून 2027 | शुक्रवार | संध्याकाळी 5:29 ते 12 जून, पहाटे 5:22 | उत्तरा फाल्गुनी |
| 12 जून 2027 | शनिवार | पहाटे 5:23 ते सकाळी 10:49 | उत्तरा फाल्गुनी |
| 13 जून 2027 | रविवार | सकाळी 9:07 ते संध्याकाळी 5:00 | हस्त |
| 15 जून 2027 | मंगळवार | सकाळी 6:48 ते संध्याकाळी 6:23 | स्वाती |
| 16 जून 2027 | बुधवार | संध्याकाळी 7:45 ते 17 जून, पहाटे 5:22 | अनुराधा |
| 17 जून 2027 | गुरुवार | पहाटे 5:23 ते रात्री 9:30 | अनुराधा |
| 19 जून 2027 | शनिवार | सकाळी 6:20 ते 20 जून, पहाटे 2:13 | मूळ |
| 20 जून 2027 | रविवार | 21 जून, पहाटे 5:05 ते 5:23 | उत्तराषाढा |
| 21 जून 2027 | सोमवार | पहाटे 5:24 ते रात्री 11:50 | उत्तराषाढा |
| 26 जून 2027 | शनिवार | संध्याकाळी 7:24 ते 27 जून, पहाटे 5:25 | उत्तरा भाद्रपदा |
| 27 जून 2027 | रविवार | पहाटे 5:26 ते 28 जून, पहाटे 5:25 | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती |
| 28 जून 2027 | सोमवार | पहाटे 5:26 ते सकाळी 11:46 | रेवती |
विवाह मुहूर्त: जुलै 2027
जुलै 2027 साठी एकही विवाह मुहूर्त दिलेला नाही: 7, 8, 9, 11 आणि 12 जुलै रोजी शुक्र सूर्यापासून 10 अंशांच्या आत, म्हणजे फार जवळ असतो, म्हणून तो अस्त मानला जातो, आणि 1 जुलैची एकमेव संभाव्य वेळ गंड योगात येते. इतर पंचांगांत जुलैच्या काही तारखा तरीही असू शकतात; कुटुंबे आपल्या पुरोहितांच्या सल्ल्यानुसार निर्णय घेऊ शकतात.
विवाह मुहूर्त: नोव्हेंबर 2027
प्रबोधिनी एकादशीला चातुर्मास संपल्यावर नोव्हेंबरमध्ये लग्ने पुन्हा सुरू होतात; तुळशी विवाह 11 नोव्हेंबर 2027 रोजी आहे, आणि परंपरेने त्यानेच लग्नसराईची सुरुवात होते. नोव्हेंबरच्या उरलेल्या दिवसांत अकरा मुहूर्त आहेत.
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 10 नोव्हेंबर 2027 | बुधवार | सकाळी 9:12 ते रात्री 11:41 | उत्तरा भाद्रपदा |
| 11 नोव्हेंबर 2027 | गुरुवार | रात्री 10:59 ते मध्यरात्रीनंतर 1:42 (12 नोव्हेंबर) | रेवती |
| 15 नोव्हेंबर 2027 | सोमवार | दुपारी 3:23 ते 16 नोव्हेंबर, सकाळी 6:00 | रोहिणी |
| 16 नोव्हेंबर 2027 | मंगळवार | सकाळी 6:44 ते दुपारी 4:43; 17 नोव्हेंबर, पहाटे 3:43 ते 4:43 | मृगशीर्ष |
| 20 नोव्हेंबर 2027 | शनिवार | 21 नोव्हेंबर, पहाटे 4:49 ते सकाळी 6:47 | मघा |
| 21 नोव्हेंबर 2027 | रविवार | सकाळी 6:48 ते संध्याकाळी 7:25 | मघा |
| 23 नोव्हेंबर 2027 | मंगळवार | दुपारी 2:09 ते 24 नोव्हेंबर, सकाळी 6:50 | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त |
| 24 नोव्हेंबर 2027 | बुधवार | सकाळी 6:51 ते संध्याकाळी 6:53 | हस्त |
| 25 नोव्हेंबर 2027 | गुरुवार | संध्याकाळी 6:18 ते 26 नोव्हेंबर, सकाळी 6:51 | स्वाती |
| 26 नोव्हेंबर 2027 | शुक्रवार | सकाळी 6:52 ते 9:48 | स्वाती |
| 29 नोव्हेंबर 2027 | सोमवार | 30 नोव्हेंबर, पहाटे 2:14 ते 2:30 | मूळ |
विवाह मुहूर्त: डिसेंबर 2027
डिसेंबरच्या मध्यात खरमास सुरू होण्यापूर्वीच्या सात तारखा; यांनी 2027 ची लग्नसराई संपते.
| तारीख | वार | मुहूर्ताची वेळ (दिल्ली) | नक्षत्र |
|---|---|---|---|
| 2 डिसेंबर 2027 | गुरुवार | दुपारी 1:45 ते 3 डिसेंबर, पहाटे 2:30 | उत्तराषाढा |
| 7 डिसेंबर 2027 | मंगळवार | दुपारी 2:16 ते 8 डिसेंबर, सकाळी 6:58 | उत्तरा भाद्रपदा |
| 8 डिसेंबर 2027 | बुधवार | 9 डिसेंबर, सकाळी 6:36 ते 7:01 | रेवती |
| 9 डिसेंबर 2027 | गुरुवार | सकाळी 7:02 ते 11:09 | रेवती |
| 12 डिसेंबर 2027 | रविवार | दुपारी 4:43 ते रात्री 11:55 | रोहिणी |
| 13 डिसेंबर 2027 | सोमवार | सकाळी 10:51 ते 14 डिसेंबर, सकाळी 7:05 | रोहिणी, मृगशीर्ष |
| 14 डिसेंबर 2027 | मंगळवार | सकाळी 7:06 ते दुपारी 1:25 | मृगशीर्ष |
चातुर्मासातील खंड: जुलैच्या मध्यापासून नोव्हेंबर 2027 च्या सुरुवातीपर्यंत
जुलैमधील देवशयनी एकादशीपासून 10 नोव्हेंबर 2027 च्या प्रबोधिनी एकादशीपर्यंत एकही विवाह मुहूर्त नाही - या लेखाच्या सुरुवातीला सांगितलेला हाच चार महिन्यांचा विराम. ऑगस्ट, सप्टेंबर आणि ऑक्टोबर 2027 मध्ये या पंचांगानुसार लग्नाची एकही तारीख नाही; त्यामुळे 2027 च्या अखेरीस लग्न करायचे ठरवत असाल, तर नोव्हेंबर आणि डिसेंबर हेच महिने हाताशी आहेत, आणि त्यांतील चांगल्या तारखांना पुरोहित आणि मंगल कार्यालये सर्वात आधी बुक होतात.
एखादी तारीख विवाह मुहूर्त कशामुळे ठरते
विवाह मुहूर्त सोयीनुसार निवडला जात नाही; पंचांगातील अनेक घटक एकाच वेळी अनुकूल जुळून येतात, तो क्षण म्हणजे मुहूर्त. सोप्या भाषेत सांगायचे तर, पंचांगकर्ते पुढील गोष्टी तपासतात:
- तिथी (चांद्र दिवस): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी आणि त्रयोदशी यांसारख्या काही तिथी टिकाऊ वैवाहिक नात्यासाठी अनुकूल मानल्या जातात. अमावास्या आणि इतर काही तिथी टाळल्या जातात.
- नक्षत्र (चंद्र ज्या नक्षत्रात असतो ते): रोहिणी, मृगशीर्ष, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूळ, उत्तराषाढा, उत्तरा भाद्रपदा आणि रेवती ही नक्षत्रे विवाहासाठी पारंपरिकरीत्या योग्य मानली जातात, आणि वरील तक्त्यांमध्ये नेमकी हीच नक्षत्रे दिसतील.
- शुक्र किंवा गुरू अस्त नसावा: शुक्र किंवा गुरू सूर्याच्या फार जवळ जातो, तेव्हा तो ग्रह "अस्त" झाला असे म्हणतात - सूर्याच्या तेजात त्याची प्रभा लोपते. पारंपरिक मान्यतेनुसार शुक्र प्रेम आणि विवाहाचा कारक आहे, तर गुरू ज्ञानाचा आणि पतीच्या कल्याणाचा; म्हणून तिथी कितीही चांगली असली, तरी यांपैकी कोणताही ग्रह अस्त असताना विवाह मुहूर्त दिला जात नाही.
- दिवसातील निर्दोष वेळ: मुहूर्ताच्या दिवशीही राहुकाळ आणि भद्रा यांसारखे अशुभ काळ टाळले जातात; म्हणूनच प्रत्येक तारखेसोबत संपूर्ण दिवसाऐवजी एक विशिष्ट वेळ दिलेली असते.
म्हणूनच वेगवेगळ्या पंचांग परंपरांमधील मुहूर्तांच्या याद्यांत थोडा फरक आढळतो. वरील तक्ते विश्वासार्ह प्राथमिक यादी म्हणून वापरा, आणि अंतिम लग्नवेळ (विधीचा नेमका क्षण) तुमच्या शहरानुसार आणि वधू-वरांच्या कुंडल्यांनुसार पुरोहितांकडून निश्चित करून घ्या.
वधू-वरांच्या कुंडलीशी मुहूर्त जुळवणे
पंचांगात दिलेले मुहूर्त ही सर्वांसाठी लागू असलेली सर्वसाधारण यादी असते. त्यातून त्या विशिष्ट वधू-वरांना अनुकूल अशी तारीख कुटुंबे निवडतात. पुरोहित किंवा ज्योतिषी दोघांच्या जन्मकुंडल्या जुळवून पाहतात (कुंडली मिलन किंवा गुणमिलन), वधू-वरांची जन्मनक्षत्रे लग्नाच्या दिवसाच्या नक्षत्राशी तपासतात, चंद्रबळ आणि ताराबळ (त्या दिवशी प्रत्येकासाठी चंद्राचे बळ) विचारात घेतात, आणि चालू दशाही पाहतात. पंचांगात उत्तम असलेली तारीख एखाद्या जोडप्यासाठी बाजूला ठेवली जाऊ शकते, तर साधारण तारीख दोघांच्या कुंडल्यांशी जुळत असल्याने अधिक योग्य ठरू शकते. व्यवहारात याचा अर्थ असा: वरील तक्त्यांतून दोन-तीन तारखा निवडा, आणि मंगल कार्यालय बुक करण्यापूर्वी त्यांतील सर्वोत्तम तारीख कुंडल्यांवरून पुरोहितांकडून पक्की करून घ्या.
स्थळ अजून पक्के व्हायचे असेल, तर 36 गुणांचा हिशोब काय सांगतो हा आमचा लेख अष्टकूट कोणते आणि 18 गुण ही पारंपरिक मर्यादा का मानली जाते ते समजावतो, आणि कुंडली जुळवण्याच्या साधनाने तुम्ही दोन कुंडल्यांची तुलना करू शकता. त्याच्याही आधी दोन्ही कुटुंबे एका पानाचा बायोडाटा एकमेकांना देतात - त्यात काय असावे, आणि जन्मतपशिलांवरून रास, नक्षत्र आणि मांगलिक स्थिती आपोआप भरणारा बायोडाटा मेकर.
तुम्ही सध्या याच टप्प्यावर असाल, तर प्रत्यक्ष लग्नासाठी किंवा साखरपुडा आणि लग्नापूर्वीच्या विधींसाठी Purohit.app वर पडताळणी झालेल्या पुरोहितांसाठी विनंती पाठवू शकता; दिल्लीतील विवाह, मुंबई, बंगळुरूमधील साखरपुडे आणि हैदराबादमधील लग्ने यांसाठीची आमची पाने पाहा, आणि निवडलेल्या तारखांमधून अंतिम लग्नवेळ ठरवण्यासही पुरोहित मदत करतील.
हिंदू विवाहात पुरोहित काय करतात
पुरोहित केवळ मंत्र म्हणणारे नसतात; ते संपूर्ण विवाह संस्काराचे सूत्रधार असतात. लग्नाच्या आधी ते लग्नवेळ ठरवतात, पूजा साहित्याची यादी तयार करतात आणि अनेकदा साखरपुडा, गणपती पूजन आणि हळद हे विधीही करतात. लग्नाच्या दिवशी हिंदू विवाह पूर्ण करणारे विधी ते क्रमाने करतात: विघ्ने दूर करण्यासाठी गणेश वंदना, कन्यादान (वधूचे दान), विवाह होमासाठी पवित्र अग्नी प्रज्वलित करणे, पाणिग्रहण (वधू-वरांचे हात हातात देणे), आणि सप्तपदी - अग्नीभोवतीची सात पावले, ज्यांत वधू-वर एकमेकांना सात वचने देतात. प्रत्येक मंत्र ते अर्थासह म्हणतात, दोन्ही कुटुंबांना त्यांच्या भूमिकेत मार्गदर्शन करतात, आणि आशीर्वादाने विधीची सांगता करतात. पारंपरिक विवाह विधीला साधारण दोन ते तीन तास लागतात, आणि चांगले पुरोहित तुमच्या कुटुंबाला सर्वात सोयीच्या भाषेत प्रत्येक टप्पा आनंदाने समजावून सांगतात.
नेहमी विचारले जाणारे प्रश्न
2026 मध्ये लग्नसराई कधी सुरू होते?
शुक्रवार, 20 नोव्हेंबर 2026 रोजीच्या प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीनंतर लग्नसराई सुरू होते. या हंगामातील पहिला विवाह मुहूर्त शनिवार, 21 नोव्हेंबर 2026 रोजी आहे.
नोव्हेंबर 2026 ते फेब्रुवारी 2027 दरम्यान लग्नाचे किती मुहूर्त आहेत?
दिल्लीसाठी एकूण 33 तारखा आहेत: नोव्हेंबर 2026 मध्ये 4, डिसेंबर 2026 मध्ये 7, जानेवारी 2027 मध्ये 9 आणि फेब्रुवारी 2027 मध्ये 13.
12 डिसेंबर 2026 नंतर, 15 जानेवारी 2027 ला लग्नसराई पुन्हा सुरू होईपर्यंत, लग्नाच्या तारखा का नाहीत?
हा खरमासाचा (दक्षिण भारतात धनुर्मासाचा) काळ आहे, जेव्हा सूर्य धनु राशीत असतो. लग्नासारखे नवे शुभारंभ परंपरेने 14 जानेवारी 2027 च्या मकर संक्रांतीपर्यंत थांबवले जातात, आणि त्यानंतरचा पहिला मुहूर्त 15 जानेवारी 2027 रोजी आहे.
जुलैच्या अखेरीपासून नोव्हेंबर 2026 च्या मध्यापर्यंत लग्ने का झाली नाहीत?
तो चातुर्मासाचा काळ होता - भगवान विष्णूंच्या योगनिद्रेचे चार महिने, ज्यांत उत्तर भारतीय पंचांगात विवाह मुहूर्त दिले जात नाहीत. 20 नोव्हेंबर 2026 रोजी, प्रबोधिनी एकादशीला विष्णू जागे झाल्यावर लग्ने पुन्हा सुरू होतात.
या मुहूर्ताच्या वेळा प्रत्येक शहरासाठी लागू आहेत का?
वरील वेळा नवी दिल्लीसाठी काढलेल्या आहेत. जवळजवळ सर्वच बाबतींत तारखा संपूर्ण उत्तर आणि मध्य भारतात त्याच राहतात (तेलुगू आणि तमिळ पंचांगांच्या स्वतंत्र याद्या असतात), पण स्थानिक सूर्योदयानुसार सुरुवातीच्या आणि शेवटच्या वेळा बदलतात; म्हणून तुमच्या शहराचे पंचांग पाहा आणि अंतिम लग्नवेळ पुरोहितांकडून निश्चित करून घ्या. मध्यरात्र ओलांडणारा मुहूर्त, पंचांगात तो ज्या तारखेचा मानला जातो, त्याच तारखेखाली दिला आहे: पुढच्या तारखेला संपणारा मुहूर्त ती रात्रभर चालतो, आणि मध्यरात्रीनंतर सुरू होऊन सूर्योदयापूर्वी संपणारा मुहूर्त पहिल्या स्तंभातील तारखेच्या रात्रीचा असतो.
शुक्र अस्त म्हणजे काय, आणि त्यामुळे लग्ने का थांबतात?
शुक्र सूर्याच्या फार जवळ जातो, तेव्हा तो अस्त झाला असे म्हणतात, आणि त्याचा शुभ प्रभाव क्षीण होतो असे मानले जाते. शुक्र हा विवाहाचा कारक ग्रह असल्याने शुक्र अस्त असताना विवाह मुहूर्त दिला जात नाही; गुरूलाही हाच नियम लागू होतो.
मुहूर्तांच्या यादीत नसलेल्या तारखेला लग्न करता येईल का?
परंपरेत यादीतील मुहूर्तालाच प्राधान्य दिले जाते, कारण या तारखा तिथी, नक्षत्र आणि ग्रहस्थितीच्या कसोट्यांवर उतरलेल्या असतात. परिस्थितीमुळे दुसरी तारीख घ्यावी लागली, तर पुरोहितांचा सल्ला घ्या; वधू-वरांच्या कुंडल्या पाहून ते योग्य वेळ शोधू शकतात, पण पंचांगात दिलेल्या तारखा हाच सर्वात सुरक्षित पर्याय आहे.
या हंगामातील सर्वात शुभ लग्नतारखा कोणत्या?
रोहिणी नक्षत्र असलेल्या तारखा (24 आणि 25 नोव्हेंबर 2026, 19 जानेवारी 2027, आणि 14 आणि 15 फेब्रुवारी 2027) विशेष मानल्या जातात, तसेच 21 नोव्हेंबर 2026 आणि 11 फेब्रुवारी 2027 या दिवसांच्या दीर्घ, अखंड वेळाही. तरीही तुमच्यासाठी सर्वोत्तम तारीख तीच, जी दोघांच्या कुंडल्यांशीही जुळते.
आम्ही कसे तपासतो: आमच्या मार्गदर्शकांतील तारखा आणि मुहूर्त प्रकाशित करण्यापूर्वी पंचांगाशी जुळवून पाहिले जातात, आणि व्यावहारिक तपशील - साहित्य, लागणारा वेळ, दक्षिणा - Purohit.app वरील प्रत्यक्ष बुकिंगवर आधारित आहेत. परंपरा समाजानुसार बदलतात; तुमच्या पुरोहितांचे मार्गदर्शनच अंतिम. हे पान आमच्या इंग्रजी मार्गदर्शकाचे भाषांतर आहे. काही वेगळे वाटल्यास इंग्रजी पान प्रमाण माना.