धनतेरस 2026: 6 नवंबर, पूजा मुहूर्त और यम दीपक
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है, और इसी से पांच दिन का दिवाली पर्व शुरू होता है। धनतेरस की लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त के बाद के गोधूलि समय में की जाती है, जो दिल्ली में शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक (भारतीय समय) रहेगा। इसके भीतर पूजा का सबसे शुभ समय, लगभग शाम 6:03 से 7:58 बजे तक, वृषभ लग्न में पड़ रहा है। सोना, चांदी और बर्तनों की खरीदारी त्रयोदशी तिथि शुरू होने के बाद, यानी लगभग सुबह 10:31 बजे से दिन भर की जा सकती है।
धनतेरस क्या है और इसका महत्व क्या है?
धनतेरस का शास्त्रीय नाम धनत्रयोदशी है - यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि है। इसके नाम में धन, यानी संपत्ति, और त्रयोदशी, यानी तेरहवां दिन, दोनों जुड़े हैं। इसी दिन दिवाली के दीये पहली बार जलाए जाते हैं, इसी दिन की गई नई खरीदारी खास तौर पर शुभ मानी जाती है, और इसी दिन तीन देवताओं की एक साथ पूजा होती है:
- भगवान धन्वंतरि, देवताओं के वैद्य, जो समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस को उनके जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, और भारत सरकार 2024 तक इसी दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाती थी; 2025 से यह दिवस 23 सितंबर को मनाया जाता है। धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना है, जो पहला और सबसे सच्चा धन है।
- भगवान कुबेर, देवताओं के कोषाध्यक्ष, जो सृष्टि के धन की रक्षा करते हैं। आर्थिक स्थिरता और अपनी कमाई को सहेजने की समझ के लिए उनकी पूजा की जाती है।
- मां लक्ष्मी, समृद्धि की देवी, जिनके स्वागत की शुरुआत धनतेरस से होती है और जो दो दिन बाद दिवाली की रात भव्य लक्ष्मी पूजा पर पूरी होती है।
इस दिन का संदेश है संपूर्ण समृद्धि: धन्वंतरि से स्वास्थ्य, कुबेर से सुरक्षा और लक्ष्मी से भरपूर वैभव।
धनतेरस 2026: तारीख और पूजा मुहूर्त
| अवसर | समय (2026, भारतीय समय) |
|---|---|
| धनतेरस की तारीख | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| त्रयोदशी तिथि शुरू | लगभग सुबह 10:31 बजे, 6 नवंबर |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | लगभग सुबह 10:48 बजे, 7 नवंबर |
| प्रदोष काल (दिल्ली) | शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक, 6 नवंबर |
| धनतेरस पूजा मुहूर्त (दिल्ली) | शाम 6:03 से 7:58 बजे तक, प्रदोष काल के भीतर वृषभ लग्न का समय |
| यम दीपक | 6 नवंबर को सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में |
दो बातें याद रखें। पहली, यह पूजा शाम की ही है: प्रदोष काल के साथ वृषभ लग्न को इसलिए श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह स्थिर लग्न है, और मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं। दूसरी, ये समय दिल्ली के हैं; पूरे भारत में सूर्यास्त का समय अलग-अलग होता है; हमारे दैनिक पंचांग में आपके शहर का सूर्यास्त दिया गया है, और पहला दीया जलाने से पहले आपके पुरोहित जी मुहूर्त पक्का कर सकते हैं।
धनतेरस पर क्या खरीदें और क्यों
धनतेरस पर कुछ नया खरीदना लक्ष्मी का स्वागत करने जैसा है, इस भाव से कि घर में धन आ रहा है। पारंपरिक चीजें, मोटे तौर पर लोकप्रियता के क्रम में:
- सोना। धनतेरस की सबसे पारंपरिक खरीदारी, सिक्के से लेकर गहनों तक। सोने को स्वयं लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और ऐसी खरीद भी, जिसका मोल कभी नहीं घटता। एक छोटा सा सिक्का भी परंपरा निभाने के लिए काफी है।
- चांदी। सिक्के, दीये, या लक्ष्मी-गणेश की छोटी मूर्तियां। चांदी का संबंध चंद्रमा से और शांत, स्थिर समृद्धि से माना जाता है।
- नए बर्तन। यह सबसे ज्यादा निभाई जाने वाली परंपरा है। पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन खरीदे जाते हैं, और खास बात यह कि उन्हें कभी खाली घर नहीं लाया जाता; नए बर्तन में चावल, पानी या मिठाई भरकर लाएं, ताकि समृद्धि भरी हुई घर में आए, खाली नहीं।
- नई झाड़ू। बहुत से लोगों को यह हैरान करता है, लेकिन झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, क्योंकि यह घर से दरिद्रता, यानी गरीबी और गंदगी, को बाहर करती है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदना पुरानी और मानी हुई परंपरा है।
- गोमती चक्र और धनिया। कई परिवारों में गोमती चक्र और साबुत धनिया खरीदा जाता है; दिवाली के बाद धनिये के बीज बोए जाते हैं, जो बढ़ते धन का प्रतीक हैं।
- वाहन, प्रॉपर्टी और इलेक्ट्रॉनिक्स। यह उसी भाव का आधुनिक रूप है; शुभता के लिए बड़ी खरीदारी अक्सर धनतेरस पर ही की जाती है।
धनतेरस पर क्या न खरीदें
परंपरा इस खास दिन के लिए कुछ खरीदारी को अशुभ भी मानती है:
- अकेले लोहे और स्टील की चीजें, खासकर चाकू और कैंची जैसी धारदार चीजें, जिन्हें शनि से जोड़ा जाता है और समृद्धि को काटने वाला माना जाता है। आज स्टील के बर्तन आमतौर पर चल जाते हैं, लेकिन कई परिवार अब भी पीतल या तांबा ही पसंद करते हैं।
- काले रंग की चीजें, जिन्हें परंपरा में त्योहार की रोशनी फैलाने के बजाय सोखने वाला माना जाता है।
- कांच और चीनी मिट्टी की चीजें, जिन्हें ज्योतिष की मान्यता में राहु से और नाजुकपन से जोड़ा जाता है।
- खाली बर्तन। बर्तन खरीदें तो उनमें कुछ भरकर ही घर लाएं।
- उधार के पैसे से कोई भी खरीद, अगर टाली जा सके। इस दिन का भाव मेहनत से कमाई समृद्धि का उत्सव मनाना है, नया साल कर्ज में शुरू करना नहीं।
इन्हें डराने वाले नियम नहीं, परंपरा की तरह लें; असली बात भाव की है। धनतेरस पर आप जो भी घर लाएं, वह घर की खुशहाली के लिए एक भेंट जैसा लगना चाहिए।
यम दीपक: मृत्यु के देवता के लिए एक दीपक
धनतेरस की शाम एक अनोखी और मन को छू लेने वाली परंपरा से जुड़ी है - यम दीपक। चौमुखा तेल का दीपक, या एक साधारण दीया, जलाकर मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है, जो मृत्यु के देवता यमराज की दिशा है। यह रीति स्कंद पुराण के एक श्लोक पर टिकी है: इस त्रयोदशी को रात होने पर घर के बाहर यमराज के लिए रखा गया दीपक अकाल मृत्यु को दूर रखता है। इसके साथ सुनाई जाने वाली कहानी एक लोकप्रिय कथा है, उस श्लोक का हिस्सा नहीं: राजा हिम के पुत्र की विवाह की चौथी रात सांप के काटने से मृत्यु होनी तय थी; उसकी पत्नी ने घर के चारों ओर दीये जलाए और पूरी रात उन्हें जलाए रखा, और सांप के रूप में आए यमराज की आंखें रोशनी से ऐसी चौंधिया गईं कि वे भीतर नहीं आ सके और लौट गए। यम दीपक इस प्रार्थना के साथ जलाया जाता है कि परिवार के किसी भी सदस्य पर अकाल मृत्यु का साया न पड़े। यह सबसे प्रसिद्ध अनुष्ठान है जिसमें दीपक सीधे यमराज को अर्पित किया जाता है, और इसे प्रदोष काल में, सूर्यास्त के ठीक बाद करना चाहिए।
घर पर धनतेरस पूजा विधि
शाम की पूजा का सरल और सही क्रम:
- पूजा स्थान और मुख्य द्वार साफ करें; छोटी सी रंगोली बनाएं और साफ लाल या पीले कपड़े से ढकी लकड़ी की चौकी रखें।
- चौकी पर लक्ष्मी, गणेश और धन्वंतरि की मूर्तियां या तस्वीरें रखें। कुबेर के लिए चांदी या कांसे की कुबेर प्रतिमा, या प्रतीक के रूप में चाबी या तिजोरी भी रखी जा सकती है।
- घी का दीपक और धूप जलाएं। संकल्प लें: अपना नाम, स्थान, तिथि और परिवार के स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए की जा रही प्रार्थना बोलें।
- हर हिंदू पूजा की तरह, विघ्नहर्ता गणेश जी की छोटी सी प्रार्थना से पूजा शुरू करें।
- दिन की नई खरीदारी - सोना, चांदी या बर्तन - हल्दी, कुमकुम और अक्षत के साथ पूजा स्थान पर अर्पित करें।
- फूल, फल और मिठाई या सूखे मेवे जैसा सादा नैवेद्य चढ़ाएं। कई क्षेत्रों में गुड़ के साथ उबला हुआ साबुत धनिया धनतेरस का पारंपरिक भोग है।
- स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि मंत्र का जाप करें, और लक्ष्मी व कुबेर की प्रार्थना करें। घर पर श्रद्धा के साथ किया गया सरल पाठ ही काफी है।
- लक्ष्मी और धन्वंतरि की आरती करें, फिर मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर यम दीपक जलाएं।
- अगर आपके परिवार में परंपरा हो तो घर के चारों ओर 13 दीये जलाएं, और प्रसाद बांटें।
अगर आप चाहते हैं कि पूजा शास्त्रों के अनुसार पूरी विधि से हो, या आप धनतेरस के साथ नए घर या व्यवसाय के लिए लक्ष्मी पूजा भी कर रहे हैं, तो जांचे-परखे पुरोहित के लिए अनुरोध भेजें और किसी अनुभवी पुरोहित से घर पर पूजा कराएं। Purohit.app बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली, पुणे और चेन्नई में सेवा देता है।
दिवाली के पांच दिनों में धनतेरस
पांच दिन के इस दीपोत्सव में धनतेरस दिन 1 है। इसके बाद शनिवार, 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली, रविवार, 8 नवंबर को दिवाली की मुख्य लक्ष्मी पूजा, मंगलवार, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और बुधवार, 11 नवंबर को भाई दूज है। धनतेरस की खरीदारी और साफ-सफाई मुख्य रात की तैयारी है; आज खरीदा गया बर्तन अक्सर दिवाली की लक्ष्मी पूजा का कलश बनता है। दिवाली की पूरी पूजा विधि और खरीदारी की सूची के लिए हमारी लक्ष्मी पूजा विधि और सामग्री गाइड देखें।
अलग-अलग क्षेत्र इस दिन को, और इससे पहले वाले दिन को भी, अपने-अपने ढंग से मनाते हैं:
- महाराष्ट्र और गुजरात: दिवाली की शुरुआत धनतेरस से पहले की द्वादशी को वसुबारस (गुजरात में वाघ बारस) से होती है, जब गायों और बछड़ों को नहलाया, सजाया और खिलाया जाता है।
- कर्नाटक: यह त्रयोदशी नीरु तुंबुव हब्बा, यानी पानी भरने का त्योहार है: स्नानघर और पानी के बर्तन रगड़कर साफ किए जाते हैं, नहाने के बड़े बर्तनों पर हल्दी-कुमकुम लगाया जाता है, और नरक चतुर्दशी के तेल स्नान के लिए पानी भरा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में धनतेरस किस तारीख को है?
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। त्रयोदशी तिथि उस दिन लगभग सुबह 10:31 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को लगभग सुबह 10:48 बजे समाप्त होगी।
2026 में धनतेरस पूजा का मुहूर्त क्या है?
पूजा प्रदोष काल में की जाती है, जो दिल्ली में 6 नवंबर को शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक (भारतीय समय) रहेगा। इसमें सबसे अच्छा समय शाम 6:03 से 7:58 बजे तक है, जो प्रदोष काल के भीतर वृषभ लग्न का समय है। समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग में देख लें।
धनतेरस 2026 पर सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय क्या है?
6 नवंबर को लगभग सुबह 10:31 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होने के बाद का कोई भी समय खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है, और तिथि 7 नवंबर की सुबह तक रहती है। शाम का प्रदोष काल पूजा के लिए रखा जाता है।
धनतेरस पर धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी तीनों की पूजा क्यों होती है?
तीनों मिलकर संपूर्ण समृद्धि के प्रतीक हैं। देवताओं के वैद्य धन्वंतरि स्वास्थ्य देते हैं, देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर आर्थिक सुरक्षा देते हैं, और लक्ष्मी वैभव और कृपा देती हैं। धनतेरस को धन्वंतरि जयंती, यानी उनके जन्मदिवस, के रूप में भी मनाया जाता है।
धनतेरस पर लोग झाड़ू क्यों खरीदते हैं?
झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, क्योंकि यह घर से दरिद्रता, यानी गरीबी और अशुद्धि, को बाहर करती है। धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना अभाव को दूर करने और समृद्धि के लिए जगह बनाने का प्रतीक है।
धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?
परंपरा लोहे की धारदार चीजें, काले रंग की चीजें, कांच और खाली बर्तन खरीदने से मना करती है। नया बर्तन खरीदें तो उसे खाली नहीं, बल्कि चावल, पानी या मिठाई भरकर घर लाएं।
यम दीपक क्या है और इसे कब जलाते हैं?
यम दीपक मृत्यु के देवता यमराज को अर्पित किया जाने वाला दीपक है, जिसे धनतेरस पर सूर्यास्त के बाद मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखा जाता है। इसे परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना के साथ जलाया जाता है।
क्या धनतेरस दिवाली का पहला दिन है?
हां। धनतेरस से पांच दिन का पर्व शुरू होता है, जिसके बाद 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी, 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर 2026 को भाई दूज है।
हम कैसे जाँचते हैं: हमारी गाइड में दी गई तिथियाँ और मुहूर्त प्रकाशित करने से पहले पंचांग से मिलाए जाते हैं, और व्यावहारिक बातें - सामग्री, समय, दक्षिणा - Purohit.app पर हुई असली बुकिंग पर आधारित हैं। परंपराएँ समुदाय के अनुसार अलग होती हैं; आपके पुरोहित की सलाह ही मान्य है। यह पेज हमारी अंग्रेज़ी गाइड का अनुवाद है। कहीं कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी पेज को ही सही मानें।